नन्ह्नी- नन्ह्नी जल की बूंदे
जब जमीन पर आती है ,
गिरती है धरती की गोद मै,
कुछ डरती कुछ घबराती है.
समझ ना पाती कहा आगाये ,
कैसे जीवन बिताना है?
आना है किसी और के काम या,
वापस बदली बन जाना है.
कंही खिलाती कोपल नई
कंही जीवन को जिलाती है ,
कभी भारती पेट गरीब का
कभी ऊष्मा मिटाती है.
नन्ही बूंदे आती है, डरती है, घबराती है .
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